आत्महत्या का सामाजिक समाधान व उचित मानसिक उपचार

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By Neucrad Health News Desk Edited by Dr. Anshuman Mishra Nov. 4, 2019

कुछ महीनो से हम, ऐसे बहुत से किस्से सुनते जा रहे हैं जहाँ मानसिक बीमारी या विकार की वजह से रोगियों ने ख़ुदकुशी जैसे भयानक रास्ते को अपनाया है। ऐसी ही एक घटना कोलकाता में जून २०१९ को घटी  जो दिल दहला देने वाली थी। जे.डी बिरला सेंटर ओफ एडुकेशन की एक १४ वर्ष की बहुत ही उज्जवल और मेधावी छात्रा कृतिका पौल ने अपने हाथ की नस काटकर स्कूल के शौचालय में अपनी जान दे दी। इस घटना के ठीक कुछ दिन बाद, ऐसी ही एक और घटना घटी। इस बार २० वर्ष के आई आई टी हैदराबाद के स्नातकोत्तर में अंतिम सत्र के छात्र ने शैक्षनिक दबाव से हार मान कर अपनी जान दे दी। यह सब घटनाऐ हमे यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि एक अच्छा जीवन बिताने के लिए एक अच्छी मानसिक अवस्था कितनी महत्वपूर्ण होती है। इस लिए हम शपथ लेते हैं कि १० अक्टूबर २०१९ , विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस (world mental health day) से हम समाज में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर काम करंगे। हम आज कुछ ऐसे मानसिक विकार के बारे में चर्चा करेंगे जिसपर अगर समय रहते घ्यान न दिया जाए तो रोगग्रस्त व्यक्ति चरम रास्ते अपना सकते हैं। 

अवसाद

अवसाद (Depression) एक बहुत ही आम मानसिक बीमारी है जिसने इस आधुनिक समाज में महामारी का रूप ले लिया है। ऐसी भी घटनाएं सामने आती है जहां स्कूल जाते बच्चे भी अवसाद का शिकार हो जाते हैं, जब वे समाज के आदर्शो को नहीं मान पाते हैं। अमरीकी संस्था सी. डी. सी. (Centres for disease Control and prevention, CDC) के आकड़ो के अनुसार बारह या उससे अधिक उम्र के  7.6% अमेरिकी  संभवतः जीवन मे कम से कम एक बार, दो सप्ताह के लिए अवसाद का शिकार हुए हैं। अवसाद के कुछ समान्य लक्षण:- चिड़चिड़ापन, बेचैनी, काम करने में रूचि का कम हो जाना-जिनमें पहले आनंद आता था, सामाजिक अलगाव, अनिद्रा, थकान, व्यर्थ की भावनाएँ, आत्महत्या करने का ख्याल आना आदि है। मनोवैज्ञानिको का मानना है, अवसाद की मूल वजह दर्दनाक बचपन, पारिवारिक इतिहास, नशीली दवाओं के दुरुपयोग (drug abuse), व्यक्तिगत शोक जैसे तलाक और अन्य काम के मुद्दे। हाँलांकि समय रहते परामर्श और इलाज होने पर इस मानसिक विकार को ठीक किया जा सकता है। 

द्रष्टि भंगता

द्रष्टि भंगता  (Bipolar disorder) एक दूसरे तरह की मानसिक विकार है जिसमें में घड़ी घड़ी मन में बदलाव आते हैं। वे भावनात्मक उतार चढ़ाव का अनुभव करते हैं। इस अवस्था में कोई व्यक्ति या रोगी कभी कभी बहुत ही अच्छे मनोदशा में रहता है पर तुरन्त ही दुखी और निराश हो जाता है। किसी भी काम को करने की रूचि समाप्त होने लगती है और इस अवस्था में आत्मा हत्या के ख्याल मन में घर कर जाता है। रोगियों के मन में इस तरह का परिवर्तन साल में कितनी भी बार आ सकता है, इसका कोई निश्चित समय नहीं होता। यह रोगियों के गतिविधि, निर्णय, व्यवहार, ऊर्जा स्तर, नींद की स्थिति को प्रभावित करता है। हाँलाकि बहुत से उच्च- कोटि  के मनौवैज्ञानिको का यह मानना है कि सही इलाज और physiotherapy ( भौतिक चिकित्सा ) से इस मानसिक विकार को कभी कभी भी ठीक किया जा सकता हैं। 

अभिघातज के बाद का तनाव विकार, पी. टी. यस. डी. (Post traumatic stress disorder, PTSD) यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जो किसी भयानक हादसे के बाद शुरू होती है। रोगी या तो खुद किसी भयानक हादसे को महसूस करते हैं या अपनी आँखों के सामने किसी भयानक हादसे को घटते हुए देखते हैं। जंग, जुर्म, दुर्घटना या किसी अपने की मौत, ऐसी कुछ घटनाऐं पी. टी. यस. डी. की शुरुआत का कारण बनती है। पीड़ितों को बार बार उस घटना का स्मरण होता है, उन्हें बुरे सपने आते हैं, गंभीर भावनात्मक पीड़ा का अनुभव होता है और वह लोगो से व उस जगह से दूर भागते है जो उस घटना से जुड़ी हुई होती हैं। पीड़ितो को पी. टी. यस. डी. के दौरान बुरे बुरे ख्याल आना बहुत आम होता है। कुछ लोग खुद से इस समस्या का हल रोज़ मर्रा की जिंदगी में खुद को व्यस्त करके निकाल लेते हैं पर अगर यह समय अस्थायी ना रहकर स्थायी हो जाए तब चिकित्सा का सहारा लेना अनिवार्य हो जाता है। 

भूलने की बीमारी

भूलने की बीमारी (Schizophrenia) एक ऐसा मानसिक रोग है जो आम तौर पर १६ से ३० साल के बीच के लोगों को अपनी चपेट में लेता है। इसमें रोगियों को बार बार भ्रम का अनुभव होता है। उत्तेजना और प्रेरणा की कमी का अहसास होता है। एकाग्रता में कमी होना, लोगों और समाज से दूरी बना लेना, यह सब schizophrenia के रोगियों के साथ होना आम बात है। उन लोगो को बेवजह डर सताता है की उन्हें किसी व्यक्ति से जान का खतरा है। परिवार में इस बिमारी का पहले से होना या दिमाग में dopamine का असंतुलन, मारिजुआना या LSD संम्बंधित दवाईयों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग करना schizophrenia के मुख्य कारण हो सकते हैं। सही चिकित्सा, मनौवैज्ञानिक परामर्श और खुद की कोशिश कभी कभी इन लक्षणो को नियंत्रित करती है। हालांकि बहुत बार ऐसा भी होता है कि रोगियों को अपनी पूरी जिंदगी इस समस्या के साथ गुजारने की आदत डालनी पड़ती है।  हमारे समाज के यह कुछ प्रचलित मानसिक बीमारियां है। हमें लोगो में इन समस्याओं के लिये जागरूकता बढ़ानी चाहिए ताकि समय रहते रोगग्रस्त व्यक्ति चिकित्सा का रास्ता अपना सके और एक तनाव मुक्त जीवन बिता सके।

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